मनसंग मुटु रिसाउदा के होला ?
आगोमा घिउ मिसाउदा के होला ?
मनसंग मुटु रिसाउदा के होला ?
मनसंग मुटु रिसाउदा के होला ?
कल्पना गर्न नसकिएला कि
घाउमा चुक बिसाउदा के होला ?
घाउमा चुक बिसाउदा के होला ?
सम्बोधन - एक कवि, पत्रकार र अभियन्ताको डिजिटल डायरी
Reviewed by Adhikari Prakash
on
December 17, 2015
Rating: 5
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